उत्तर प्रदेश के लाखों आयकरदाताओं के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार ने आयकर बकाया की वसूली के तय नियमों से गिरफ्तारी और सिविल जेल में हिरासत से जुड़े प्रावधान हटा दिए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अधिसूचना जारी कर आयकर नियमावली-2026 के नियम 225 में बड़ा बदलाव किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना गया है। अधिसूचना में गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कई उपनियम भी समाप्त कर दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश में इसका दायरा बड़ा है। यूपी से लगभग 93.3 लाख इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किए गए हैं। पूरे भारत में दाखिल होने वाले कुल आईटीआर में उत्तर प्रदेश का योगदान करीब 10% है। सूची में महाराष्ट्र (1.40 करोड़) पहले स्थान पर है और उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है। इसके बाद गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु का नंबर है।
वसूली की बाकी शक्तियां समाप्त हो गई
वरिष्ठ कर सलाहकार राजीव मेहरोत्रा के मुताबिक अब ‘गिरफ्तारी और सिविल हिरासत’ शब्द हटा दिए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आयकर की बकाया मांग खत्म हो गई है या विभाग की वसूली की बाकी शक्तियां समाप्त हो गई हैं।
बकाया कर की वसूली के लिए सीज करने जैसी शक्तियां रहेंगी।
यूपी में आयकर विभाग लगातार तलाशी और सर्वे कार्रवाई करता रहा है। हाल के वर्षों में कानपुर, नोएडा, लखनऊ और अन्य शहरों में बड़े कारोबारी समूहों पर कार्रवाई हुई है। यूपी 2019 से 2025 के पांच वर्षों में आयकर अधिनियम के तहत लगभग 3025 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें सबसे अधिक 1,122 गिरफ्तारियां वर्ष 2023 में हुईं। इसी अधिसूचना में वैल्यूअर और अधिकृत आयकर प्रैक्टिशनर से संबंधित पंजीकरण की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। इसे 30 सितंबर 2026 की जगह 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। यानी संबंधित लोगों को छह महीने का अतिरिक्त समय मिला है।
