लखनऊ। गांवों में अब सिर्फ विकास कार्य कराना ही नहीं, बल्कि अपने काम के दम पर प्रदेश की चुनिंदा 10 ग्राम पंचायतों में जगह बनाना भी बड़ी उपलब्धि होगी। पंचायतीराज विभाग ने पहली बार ‘मुख्यमंत्री विशेष पुरस्कार’ शुरू किया है। इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाली प्रदेश की 10 ग्राम पंचायतों को 50-50 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। यानी उत्कृष्ट पंचायतों के लिए कुल पांच करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई है। दरअसल, मुख्यमंत्री पंचायत पुरस्कार योजना के तहत प्रत्येक जिले की पांच ग्राम पंचायतों यानी प्रदेश की 375 पंचायतों को हर वर्ष पुरस्कृत किया जाता है। इसके साथ ही ‘मुख्यमंत्री विशेष पुरस्कार’ भी शुरू किया गया है। इसके तहत पूरे प्रदेश से 10 पंचायतों को उनके विशिष्ट क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए 50 लाख रुपये का विशेष पुरस्कार दिया जाएगा। इस पहल से गांवों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल सेवाओं, महिला सहभागिता और टिकाऊ कृषि जैसे क्षेत्रों में बेहतर काम को प्रोत्साहन मिलेगा। निदेशक पंचायतीराज अमित सिंह के मुताबिक, प्रदेश की सभी इच्छुक और पात्र ग्राम पंचायतें 15 से 30 सितंबर के बीच आनलाइन पोर्टल के माध्यम से पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकती हैं। पुरस्कार के लिए पंचायतों का चयन 10 विशेष श्रेणियों में किया जाएगा। इनमें घर-घर कचरा संग्रह, तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वयं की आय बढ़ाने, प्लास्टिक मुक्त पंचायत व प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन, कामन सर्विस सेंटर के जरिए सार्वजनिक सेवाएं, पर्यावरण संरक्षण व जैव विविधता संवर्धन, ‘मेरा तालाब मेरी योजना’, महिला नेतृत्व व सहभागिता, आधार केंद्रों के माध्यम से सेवाएं और सर्वाधिक जैविक कृषि शामिल हैं। विभाग का मानना है कि यह पुरस्कार गांवों में नवाचार और सुशासन को बढ़ावा देने के साथ पंचायतों को आत्मनिर्भर, स्वच्छ और समृद्ध बनाने की दिशा में प्रतिस्पर्धा को नई धार देगा।
