IMG_20260912_093751

जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण की प्रक्रिया में केंद्र स्तर से हुए संशोधन के बाद विलंबित पंजीकरण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निदेशक नागरिक पंजीकरण ने स्पष्ट किया है कि नए संशोधन अधिसूचना होने के बाद लागू होंगे। तब तक पूर्ववर्ती व्यवस्था ही लागू रहेगी। यानी एक वर्ष से अधिक विलंब से पंजीकरण के लिए आने वाले मामलों को एसडीएम ही स्वीकृति देते रहेंगे। केंद्र सरकार ने हाल ही में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में संशोधन किया है। इसके तहत अब एक से दो वर्ष तक विलंबित पंजीकरण के मामलों को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर से स्वीकृति दी जाएगी। वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।अभी व्यवस्था यह है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के एक वर्ष से अधिक विलंब से आने वाले मामलों की स्वीकृति एसडीएम स्तर से ही की जाती है। नए संशोधन के बाद इस प्रक्रिया को दो वर्ष तक के मामलों के लिए एसडीएम के अधिकार क्षेत्र में रखा गया है। दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए संबंधित व्यक्ति को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन करना होगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे मामलों में पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। निदेशक नागरिक पंजीकरण ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में नए संशोधन अधिसूचना जारी होने के बाद लागू होंगे। इससे पहले पूर्ववर्ती व्यवस्था ही जारी रहेगी।

error: Content is protected !!