देहरादून। उत्तराखंड के करीब 27 लाख बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर प्रदेश से परिसंपत्तियों और देनदारियों के बंटवारे को लेकर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) के करीब ₹5,900 करोड़ के दावे को खारिज कर दिया है। आयोग ने इसमें से केवल ₹389.33 करोड़ की राशि को जायज माना है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि UPCL और शासन की प्रशासनिक लेटलतीफी का आर्थिक बोझ प्रदेश की जनता पर नहीं डाला जा सकता। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी ने मामले में जनसुनवाई के बाद यह फैसला दिया।
₹4,963 करोड़ की कैरिंग कॉस्ट को किया खारिज
आयोग के मुताबिक UPCL ने कुल ₹5,900.01 करोड़ का दावा किया था। इसमें वास्तविक दावा करीब ₹936.37 करोड़ था, जबकि लगभग ₹4,963.65 करोड़ वर्षों की देरी पर चक्रवृद्धि आधार पर मांगी गई कैरिंग कॉस्ट थी। आयोग ने इस पूरी कैरिंग कॉस्ट को खारिज कर दिया।
आयोग ने कहा कि वर्ष 2003 में ट्रांसफर स्कीम बनने के बाद UPCL लंबे समय तक इस मामले को आगे नहीं बढ़ा सका। वर्ष 2013 के बाद करीब छह साल तक कोई पत्राचार नहीं हुआ। वहीं, वर्ष 2022 में अधिसूचना जारी होने के बाद भी करीब चार साल तक मामला आयोग के समक्ष नहीं लाया गया।
शेयर पूंजी पर रिटर्न का दावा भी खारिज
UPCL की ओर से केंद्र सरकार के उपक्रमों के बकाये के रूप में करीब ₹572 करोड़ को राज्य सरकार की ओर से शेयर पूंजी में बदलने के आधार पर रिटर्न का दावा भी किया गया था। आयोग ने इस दावे को भी स्वीकार नहीं किया।
इन मदों में मिली मंजूरी
आयोग ने कुल ₹389.33 करोड़ की राशि को ही जायज माना है।
मूल्यह्रास (Depreciation): ₹288.70 करोड़
रीजनेबल रिटर्न: ₹97.75 करोड़
कार्यशील पूंजी पर ब्याज: ₹2.88 करोड़
कैरिंग कॉस्ट: शून्य
कुल मंजूर: ₹389.33 करोड़
अभी बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं
आयोग ने साफ किया है कि इस फैसले के कारण फिलहाल बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है। आयोग ने सुझाव दिया है कि सरकार चाहे तो ₹389.33 करोड़ की स्वीकृत राशि को UPCL की राज्य सरकार के प्रति देनदारियों के साथ समायोजित कर सकती है।
यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इस राशि को आगामी टैरिफ प्रस्तावों में चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर विचार किया जाएगा। इससे बिजली उपभोक्ताओं पर एकमुश्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के बाद नवंबर 2001 में केंद्र सरकार के आदेश के तहत उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और नवगठित UPCL के बीच संपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा किया गया था।
12 अक्टूबर 2003 को दोनों निगमों के बीच संपत्ति ट्रांसफर स्कीम तैयार हुई, लेकिन इसे राज्य सरकार की ओर से औपचारिक रूप से अधिसूचित होने में करीब दो दशक लग गए। यह स्कीम 8 मार्च 2022 को गजट में अधिसूचित हुई।
इसके बाद UPCL ने बची हुई संपत्तियों के आधार पर मूल्यह्रास, इक्विटी पर रिटर्न, कार्यशील पूंजी पर ब्याज और वर्षों की देरी की कैरिंग कॉस्ट जोड़कर कुल ₹5,900.01 करोड़ का अतिरिक्त एआरआर दावा किया था। आयोग ने जांच के बाद इसमें से केवल ₹389.33 करोड़ को ही स्वीकार किया।
