हल्द्वानी के बिठौरिया निवासी एक व्यक्ति से पॉलिसी का प्रीमियम बोनस सहित वापस दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने 72.33 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपितों ने खुद को एनपीसीआई का अधिकारी बताकर विभिन्न चार्ज के नाम पर करीब दस माह तक रकम जमा कराई। मोबाइल नंबर बंद होने पर पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
पीड़ित ने पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए बैंक खातों और 84 ट्रांजेक्शन का विवरण भी सौंपा है। मामले में साइबर थाना पुलिस ने प्राथमिकी पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी है।
हल्द्वानी के बिठौरिया नंबर एक निवासी व्यक्ति ने बताया कि वह एक प्रतिष्ठित स्कूल से सेवानिवृत्त क्लर्क हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर विभिन्न बीमा कंपनियों में पांच अलग-अलग पालिसियां ली थीं। इनका पहला प्रीमियम करीब 80 हजार रुपये जमा किया था, लेकिन बाद में किसी कारणवश दूसरी किस्त जमा नहीं कर सके।
जुलाई 2025 से उनके मोबाइल पर अलग-अलग नंबरों से काल आने लगी। 14 जुलाई 2025 को एक व्यक्ति ने स्वयं को संदीप शर्मा बताते हुए एनपीसीआई में असिस्टेंट मैनेजर एवं फंड ट्रांसफर मैनेजर के पद पर कार्यरत होने का दावा किया। कहा कि पांचों पालिसियों का पहला प्रीमियम बोनस सहित करीब एक करोड़ रुपये बनता है, जिसे वह रिफंड करा सकता है। इसके लिए उसने आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो वाटसएप पर मंगवाए।
दस्तावेज मिलने के बाद आरोपितों ने प्रोसेसिंग फीस, कैपिटल गेन टैक्स, जीएसटी, आरबीआई प्रोसेसिंग चार्ज, चालान और अन्य शुल्क के नाम पर लगातार धनराशि जमा करानी शुरू कर दी। उनकी बातों पर विश्वास कर बैंक आफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और एक्सिस बैंक के अपने खातों से उनके बताए गए बैंक खातों में 14 जुलाई 2025 से छह मई 2026 के बीच 84 आनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 7233600 रुपये जमा कर दिए। रकम जमा कराने के बाद आरोपितों के सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए। तब उन्हें अपने साथ साइबर ठगी होने का एहसास हुआ। निरीक्षक साइबर थाना अरूण कुमार ने बताया कि अज्ञात साइबर ठगों पर प्राथमिकी पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही जिन बैंक खातों में ट्रांजेक्शन हुआ है, वहां से रुपये कहां गए, उसकी भी जांच की जा रही है।
