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देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दूसरे चरण के तहत मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और मतदाताओं की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपील की स्पष्ट व्यवस्था की है। बूथ स्तर पर नोटिस की सुनवाई शुरू हो गई है और यदि कोई मतदाता दावे व आपत्तियों के बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है तो उसे अपील का अधिकार मिलेगा। इसके लिए उसे पहले जिलाधिकारी और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील करने का अधिकार मिलेगा।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डा विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि प्रथम चरण पूरा होने के बाद प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 71,33,785 मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। उन्होंने सभी मतदाताओं से अपील की कि वे ड्राफ्ट सूची में अपना नाम और अन्य विवरणों का सावधानीपूर्वक मिलान कर लें। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं के विवरण में विसंगति पाई गई है या जिन्होंने आवश्यक जानकारी पूरी नहीं भरी है, ऐसे 24 लाख से अधिक मतदाताओं को बीएलओ के माध्यम से नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। सभी विधानसभा क्षेत्रों में एईआरओ और ईआरओ की देखरेख में बूथ स्तर पर ही सुनवाई की व्यवस्था की गई है। मैदानी क्षेत्रों में मतदाताओं की सुविधा के लिए बूथ अथवा उसके निकट विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आयोग ने 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक फार्म- 6, फार्म-7 और और फार्म- 8 के माध्यम से दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया है, जबकि 14 जुलाई से 11 सितंबर तक इनका निस्तारण किया जाएगा।

ईआरओ के निर्णय से असंतुष्ट मतदाता दो सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी कार्यालय में अपील कर सकेंगे। यदि मतदाता जिलाधिकारी के निर्णय से भी संतुष्टि नहीं होती तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में दूसरी अपील की जा सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जिन पात्र नागरिकों का नाम अभी मतदाता सूची में शामिल नहीं है, वे फार्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वा सकते हैं। वहीं फार्म-7 से नाम हटाने और फार्म-8 से विवरण में संशोधन कराया जा सकता है।

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