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नई दिल्ली। मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार हंगामे के चलते संसद का गतिरोध जारी है। लोकसभा में शुक्रवार को जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित करा लिया गया। प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, चढ़ावा चोरी एवं अन्य मुद्दों पर विपक्ष सरकार को घेरता रहा।

इसी कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका और अंतत: दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के बीच इस सत्र में अभी तक लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक को दोनों सदनों से पारित करा लिया गया है।

प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सदस्य नारे लगाते हुए आसन के सामने आ गए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आग्रह को भी अनसुना करते रहे। बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल सरकार की जवाबदेही तय करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, लेकिन विपक्ष उसे चलने नहीं दे रहा। कुछ सदस्य संसद परिसर में अलग-अलग वेशभूषा में प्रदर्शन कर सदन की गरिमा को प्रभावित कर रहे हैं। इसके बाद कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी गई।

दोपहर में सदन की बैठक शुरू होने पर विपक्ष के हंगामे और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग के बीच सरकार ने विधेयक पर चर्चा एवं पारित कराने के लिए पेश किया। भारी शोर-शराबे के बीच इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस विधेयक पर चर्चा चाहती थी, मगर विपक्ष ने भाग नहीं लिया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और जनता अपने प्रतिनिधियों से जवाब मांगेगी।

कार्यवाही सोमवार तक स्थगित

राज्यसभा में भी विपक्ष के हंगामे के कारण कोई कामकाज नहीं हो सका। विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

देर हुई तो काटने होंगे कोर्ट के चक्कर

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक का उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु के समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना तथा देर से पंजीकरण की प्रक्रिया को और सख्त बनाना है। नए प्रविधान के तहत यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो वर्ष से अधिक समय बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है तो पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी। अभी एक वर्ष से अधिक विलंब के मामलों में जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण हो सकता है। संशोधन के बाद यह व्यवस्था एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी के मामलों में लागू रहेगी, जबकि दो वर्ष से अधिक देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी।

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