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उत्तरकाशी के भंगेली गांव में बीमार हुए 15 बच्चों में से आठ में कॉक्ससैकी वायरस की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञ वायरस से होने वाली बीमारी को हाथ, पैर और मुंह यानी एचएफएमडी बीमारी का नाम दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव के अन्य बच्चों की भी जांच कर रही है। नैनीताल जिले के ज्योलीकोट में जिस तरह से दूषित पानी पीने से कई लोगों के बीमार होने और मौत की घटना सामने आई थी, ऐसे में उत्तरकाशी के भंगेली गांव में बच्चों के बीमार होने की घटना डराने वाली है। स्वास्थ्य विभाग ने इस बात पर तो मुहर लगाई है कि बच्चे दूषित पानी से ही एचएफएमडी बीमारी की चपेट में आए हैं लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वायरस पेयजल स्रोत से आने वाले पानी में था या अन्य स्रोत में। हालांकि जल संस्थान ने पेयजल के दूषित नहीं होने की दावा किया है। इसमें कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद ही पता चल सकेगी। हालांकि जल संस्थान ने जल स्रोतों की निगरानी तेज कर दी है। भटवाड़ी समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. वेद मोइक के मुताबिक बच्चों के हाथ, पैर और मुंह पर दाने के अलावा तेज बुखार, गले में दर्द और भूख न लगने की शिकायत सामने आ रही थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर जांच की तो इसके लक्षण एचएफएमडी बीमारी से मिलते-जुलते मिले। इस तरह के लक्षण वाले 15 बच्चों की जांच हुई तो आठ बच्चों में बीमारी की पुष्टि हुई। यह बीमारी आमतौर पर सात वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखी जाती है।

उत्तरकाशी जिले में वर्तमान में एक भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है। गांव में जब एक साथ कई बच्चे बीमार हुए तो स्वास्थ्य विभाग को उनके उपचार के लिए फिजिशियन को लगाना पड़ा। चिकित्सकों ने दूसरे जिलों के बाल रोग विशेषज्ञों से सलाह लेकर बच्चों को उपचार दिया। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बच्चों के उपचार के लिए बाल रोग विशेषज्ञ इसलिए भी जरूरी होता है क्योंकि वह बच्चों की मानसिक और शारीरिक जरूरत को बेहतर ढंग से समझते हैं। इसके अलावा दवाओं की खुराक भी तय करने में उनका योगदान है। इसमें शरीर के विकास का भी ध्यान रखना पड़ता है।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ. अशोक कुमार बताते हैं कॉक्ससैकी वायरस मुख्य रूप से दूषित सतहों में पनपता है। हाथ, पैर और मुंह के माध्यम से यह शरीर में संक्रमण पैदा करता है। यह एक बच्चे से दूसरे बच्चे में बहुत तेजी से फैलता है। ये एंटरोवायरस परिवार का हिस्सा है जो इंसानी पाचन तंत्र (आंतों) में जीवित रहता है और संख्या बढ़ाता है। कई बार यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।ऐसे करना होगा बचाव- पानी को 15 मिनट तक उबालकर पिएं- सब्जियां गर्म पानी से धुलकर पकाएं- बच्चों को बाहर न जाने देडॉक्टरों की टीम गांव में कैंप लगाकर बच्चों की जांच कर रही है। आस-पास के गांव के बच्चों की भी जांच की जा रही है। इस तरह के लक्षण वाले बच्चों में बढ़ोतरी हुई है। टीम निगरानी रखे हुए है।-डॉ. श्याम विजय सिंह, मुख्स चिकित्सा अधिकारी उत्तरकाशभंगेली गांव से सैंपल लिए गए हैं। इसके अलावा पूरे प्रदेश में जल स्रोतों की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए निगरानी बढ़ाई गई है। टीमें कैंप लगाकर कई दिनों तक पानी की जांच कर रही हैं।डीके सिंह, मुख्य महाप्रबंधक जल संस्थान

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