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कानपुर। नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री व मार्कशीट बनाने वाले गिरोह से जुड़े एक बिचौलिये को विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपित डेढ़ साल पहले गिरोह के सरगना शैलेंद्र ओझा के संपर्क में आया था। दोनों के बीच 7.53 लाख रुपये का लेनदेन भी मिला है।

डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि मूलरूप से बिहार के बक्सर निवासी व वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में रहने वाले विनीत राय उर्फ वीके को जेल भेजा गया है। बीती 18 फरवरी को पुलिस ने शैल ग्रुप आफ एजुकेशन के कार्यालय में छापा मारकर फर्जी डिग्री बनाने वाले बड़े गिरोह का राजफाश किया था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नौ राज्यों के 14 विश्वविद्यालयों तथा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज की 1030 फर्जी मार्कशीट व डिग्रियां बरामद की थीं। पुलिस ने गिरोह के सरगना शैलेंद्र ओझा, नागेशमणि त्रिपाठी, जोगेंद्र व अश्वनी कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

एसआइटी की जांच में सामने आया कि विनीत राय सरगना शैलेंद्र के लिए बिचौलये का काम करता था। उसने सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से बीसीए करने के बाद ग्रेटर नोएडा स्थित एक्यूरेट ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस से परास्नातक की डिग्री ली थी। इसके बाद वह निजी विश्वविद्यालयों के लिए मार्केटिंग का काम करने लगा। फरवरी,2023 में उसने हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी ज्वाइन की थी।

इसी दौरान उसकी मुलाकात शैलेंद्र ओझा से हुई थी। आरोपित ने बताया कि वह अब तक आठ छात्रों को एलएलबी में दाखिला दिलाकर डिग्री उपलब्ध करा चुका है। हालांकि, शैलेंद्र ओझा के कार्यालय से मिली एक छात्र की बीए की डिग्री के बारे में उसने जानकारी से इन्कार किया।

जांच में पता चला है कि शैलेंद्र के संपर्क मोनाड यूनिवर्सिटी में पहले प्लानिंग मैनेजर रहे रोहित शर्मा से भी थे, जिसने कुछ महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। अब एसआइटी रोहित की तलाश में जुट गई है।

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