लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय करीब 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद डाक्टरेट ऑफ लेटर्स (डी.लिट.), डाक्टरेट ऑफ साइंस (डी.एससी.) और डाक्टरेट ऑफ लॉज (एलएलडी) जैसे शीर्ष उच्च शैक्षणिक अनुसंधान पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया को फिर शुरू करेगा। इसके लिए विश्वविद्यालय की विभिन्न सक्षम निकायों से ‘ऑर्डिनेंस गवर्निंग द अवार्ड ऑफ द डिग्री ऑफ डी. लिट., डी.एससी. एंड एल.एल.डी. 2025’ को पारित किया जा चुका है।
राजभवन से इस नए अध्यादेश को अंतिम औपचारिक मंजूरी मिलते ही विश्वविद्यालय प्रवेश के लिए आधिकारिक अधिसूचना और पंजीकरण प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
प्रवक्ता प्रोफेसर मुकुल श्रीवास्तव ने बताया कि डी.लिट. की उपाधि कला, शिक्षा, वाणिज्य, और ललित कला संकायों के लिए, डी.एससी.की उपाधि विज्ञान, इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी व फार्मेसी संकायों तथा एल.एल.डी. की उपाधि विधि संकाय के शोधार्थियों को दी जाएगी।
प्रवेश के लिए अनिवार्य योग्यता और कड़े मानक
अध्यादेश 2025 के अनुसार, इन डिग्रियों में प्रवेश केवल उन्हीं मेधावी अभ्यर्थियों को दिया जाएगा, जिन्होंने संबंधित विषय में उत्कृष्ट वैश्विक योगदान के साथ असाधारण अनुसंधान कार्य किया हो। अभ्यर्थी के पास किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय या यूजीसी से मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में पीएच.डी या उसके समकक्ष उपाधि होना अनिवार्य है।
पीएच.डी. उपाधि प्राप्त करने के बाद अभ्यर्थी के पास शिक्षण, अनुसंधान, प्रशासन या संबंधित क्षेत्र में पेशेवर के रूप में न्यूनतम पांच वर्ष की नियमित नियुक्ति का अनुभव जरूरी है। आवेदनकर्ता के प्रस्तावित शोध क्षेत्र से संबंधित न्यूनतम 10 शोध पत्र विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त, यूजीसी लिस्टेड या न्यूनतम 5.0 के कुल इम्पैक्ट फैक्टर वाले प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित होने चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी का इन सभी शोध पत्रों में प्रथम लेखक या करेस्पांडिंग लेखक होना अनिवार्य है।
मार्गदर्शन की दोहरी व्यवस्था
अध्यादेश में दो प्रकार से अनुसंधान संपन्न करने का विशिष्ट प्रविधान किया गया है। जो अभ्यर्थी किसी विशेषज्ञ के अधीन शोध करना चाहते हैं, उन्हें विश्वविद्यालय एक एडवाइजर आवंटित करेगा। इस अध्यादेश के तहत केवल वही प्रोफेसर गाइड बन सकेंगे, जिन्होंने न्यूनतम पांच पीएच.डी विद्यार्थियों का सफल मार्गदर्शन किया हो। एक प्रोफेसर अधिकतम दो अभ्यर्थियों को ही एक समय में निर्देशित कर सकते हैं, जिसमें एक शैक्षणिक वर्ष में केवल एक दाखिला शामिल हो सकता है। ऐसे वरिष्ठ और उत्कृष्ट शोधार्थी जो बिना किसी गाइड के स्वतंत्र रूप से शोध करना चाहते हैं, वे सेल्फ सुपरवाइज्ड स्कालर के रूप में प्रवेश ले सकते हैं।
जाने प्रवेश प्रक्रिया
योग्य अभ्यर्थियों को निर्धारित आवेदन शुल्क के साथ फार्म भरना होगा, जिसके साथ उन्हें 1500 से 3000 शब्दों का एक विस्तृत सिनाप्सिस (6 प्रतियां) जमा करनी होगी। साथ ही पिछले शोध कार्यों का 1000 शब्दों का संक्षिप्त विवरण और एनओसी देनी होगी। कुलपति द्वारा गठित उच्च स्तरीय पोस्ट-डाक्टोरल रिसर्च कमेटी पब्लिकेशन्स की गुणवत्ता की जांच कर प्रवेश की संस्तुति करेगी। पंजीकृत अभ्यर्थी अपना शोध कार्य न्यूनतम दो वर्ष और अधिकतम चार वर्ष के अंदर जमा कर सकेंगे।
