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हरिद्वार। पश्चिम उत्तर प्रदेश निवासी पांच सदस्यीय एक परिवार ने संतों के सानिध्य में स्वेच्छा से सनातन धर्म को अंगीकार किया। चंडीघाट स्थित नमामि गंगे घाट पर सम्पन्न कार्यक्रम में परिवार ने गंगा स्नान, हवन, धार्मिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार के साथ सनातन धर्म अपनाया। मंगलवार को हरिद्वार में चंडीघाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य परिवार का गंगाजल से स्नान कराकर शुद्धि प्रक्रिया प्रारंभ की गई।इसके पश्चात गौरीशंकर मंदिर, गौशाला परिसर में संत राम विशाल दास महाराज के सान्निध्य और अरुण कृष्ण महाराज के मार्गदर्शन में शुद्धि संस्कार विधिवत सम्पन्न कराया गया। आचार्य कुलदीप विद्यार्थी एवं अनुज शास्त्री की ओर से वैदिक यज्ञ आयोजित कर शास्त्रोक्त परंपराओं के अनुसार समस्त संस्कार पूरे कराए गए।

इस अवसर पर परिवार का यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार भी संपन्न हुआ। साथ ही वैदिक परंपरा के अनुरूप नामकरण संस्कार किया गया, जिसमें मोहम्मद शहजाद का नाम ‘शंकर’, उनकी पत्नी रजिया का नाम ‘सावित्री’, ज्येष्ठ पुत्री का नाम ‘रुक्मिणी’, कनिष्ठ पुत्री का नाम ‘दीक्षा’ तथा पुत्र का नाम ‘रुद्र’ रखा गया।

इसके उपरांत दंपती का हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पुन विवाह संस्कार भी संपन्न कराया गया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के अध्यक्ष स्वामी प्रमोद आनंद गिरी ने बताया कि संबंधित परिवार लंबे समय से उनके संपर्क में था और स्वयं की इच्छा से सनातन धर्म में वापसी का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूर्णतः स्वैच्छिक और वैदिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न कराई गई है। राम विशाल दास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन एवं समावेशी जीवन दर्शन है, जो मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इस मार्ग को अपनाने वालों का सदैव स्वागत है। वहीं संतों ने प्रशासन से परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

परिवार के मुखिया शंकर (पूर्व में शहजाद) ने कहा कि वे पहले से ही सनातन विचारधारा से प्रभावित थे और अब पूर्ण आस्था के साथ इस मार्ग को अपनाया है। उन्होंने आशंका जताई कि उन्हें अपने पूर्व परिचितों से खतरा हो सकता है, जिस पर संतों ने प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है।

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