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देहरादून। उत्तराखंड में फर्जी राशन कार्ड, आधार और आयुष्मान कार्ड के जरिए सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग के मामलों को लेकर धामी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेशभर में राशन कार्डों का व्यापक सत्यापन अभियान एक बार फिर शुरू किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए न केवल पात्र लोगों का हक छीना जा रहा है, बल्कि राज्य पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें अन्य राज्यों के लोगों द्वारा फर्जी राशन कार्ड और आधार के आधार पर आयुष्मान योजना का लाभ लेने के मामले शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, इन दस्तावेजों के जरिए गैस कनेक्शन लेकर सब्सिडी लेने की शिकायतें भी मिली हैं। इससे पहले चलाए गए सत्यापन अभियान में करीब 70 हजार राशन कार्ड यूनिट्स फर्जी पाए गए थे, लेकिन विभागीय व्यस्तताओं के चलते यह अभियान बीच में ही रोक दिया गया था। अब मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर इसे फिर से तेज किया जा रहा है।

प्रदेश में वर्तमान में लगभग 9,050 सस्ते गल्ले की दुकानों के माध्यम से 23 लाख 40 हजार से अधिक राशन कार्डों पर करीब 94 लाख 95 हजार लोगों को खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। वहीं ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना के तहत 20,315 बाहरी राज्यों के परिवार भी उत्तराखंड में राशन का लाभ ले रहे हैं।

खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव एल. फैनई ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर इस अभियान को प्राथमिकता से चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत विशेष स्क्वायड गठित कर राशन कार्ड, आधार, आयुष्मान कार्ड और गैस कनेक्शन की आपसी लिंकिंग की गहन जांच की जाएगी।

सरकार का लक्ष्य फर्जी लाभार्थियों की पहचान कर इस नेटवर्क को खत्म करना और योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाना है।

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