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रुद्रपुर। बैंक से करोड़ों का ऋण लेकर उसे अदा न करने और बंधक रखी मशीनरी को गायब करने का मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दि नैनीताल बैंक लिमिटेड, सिविल लाइंस शाखा रुद्रपुर के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अपूर्व पाण्डेय ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि 26 दिसंबर 2016 को मैसर्स रुद्रा ऑटो टेक इंजीनियरिंग प्रा. लि., प्लॉट नंबर-42 बी, सेक्टर-IIE, सिडकुल पंतनगर के डायरेक्टर्स—विशाल सिंह, स्वीटी सिंह और गीता शाह ने विभिन्न कैश क्रेडिट और टर्म लोन खातों के माध्यम से प्लांट व मशीनरी खरीदने के लिए करीब 77 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।

आरोप है कि ऋण खातों की किस्तें नियमित रूप से जमा नहीं की गईं, जिसके चलते 23 जनवरी 2019 को खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके बाद बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की। 7 नवंबर 2023 को जिलाधिकारी ने बैंक के पक्ष में निर्णय देते हुए प्लांट और मशीनरी पर भौतिक कब्जा लेने की अनुमति दे दी।

लेकिन 11 जून 2024 को जब बैंक अधिकारी कब्जा लेने पहुंचे तो फैक्ट्री से पूरी मशीनरी गायब मिली। आरोप है कि बंधक रखी गई संपत्ति को बिना अनुमति बेच दिया गया, जो अमानत में खयानत की श्रेणी में आता है।

इस संबंध में बैंक ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली। अब न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने तीनों डायरेक्टर्स के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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