08_08_2024-fake_cast_fraud

रुद्रपुर। बाहरी राज्यों से आकर उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लालच में लोग पिता बदलने से भी नहीं चूक रहे। यूपी से गदरपुर के आकर बसे एक व्यक्ति ने अपने ही पिता का नाम बदलकर फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवा लिया।इसके आधार पर वह कई सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले चुका है। प्रशासन ने जाति प्रमाणपत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में जाति, स्थायी निवास व अन्य फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने का मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बने दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में ऊधमसिंह नगर में संदिग्ध दस्तावेजों की जांच के दाैरान टीम को गदरपुर क्षेत्र के लगड़ाभोज वरीराई निवासी मोहम्मद हनीफ के दस्तावेजों पर शक हुआ। जांच की आंच पहुंची तो कार्रवाई के डर से हनीफ खुद सामने आ गया।

जांच टीम के अनुसार, इस प्रमाणपत्र के आधार पर वह कई सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बन चुका है। दस्तावेज मांगे जाने के बाद कार्रवाई के डर से मोहम्मद हनीफ खुद एसडीएम के समक्ष पहुंचा। उसने स्वीकार किया कि जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए जिन किफायत अली के नाम का इस्तेमाल किया वह उसके पिता नहीं हैं। हनीफ के असली पिता कीफात शाह पुत्र शायद अली शाह हैं। जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसने वर्ष 1989 में जारी आनंदखेड़ा रामबाग निवासी किफायत अली पुत्र ददली अली के नाम का राशन कार्ड प्रस्तुत किया था। इस नाम से संबंधित उसके पास कोई अन्य पहचान संबंधी साक्ष्य नहीं है।

हेराफेरी की जानकारी सामने आने के बाद एसडीएम ने मामले को स्क्रूटनी कमेटी के समक्ष रखा। इसके बाद हनीफ के जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने की संस्तुति कर दी गई है। जांच की जा रही है कि उसने किन-किन योजनाओं का लाभ लिया है।

जनसेवा केंद्र से बनवाया प्रमाणपत्र

हनीफ के अनुसार उसने जाति प्रमाणपत्र संजय सैनी जनसेवा केंद्र के माध्यम से बनवाया था। उसका कहना है कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि किफायत अली के नाम के साथ पिता का नाम ददली अली दर्ज है। दादा का नाम अलग होने के कारण उसे पकड़े जाने का डर सता रहा था और वह परेशान था।

यह है नियम

जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए यह आवश्यक है कि आवेदक या उसके पूर्वज राज्य गठन से कम से कम 15 वर्ष पहले उत्तराखंड के निवासी रहे हों। सामान्यतः वर्ष 1985 से पहले के दस्तावेजों के आधार पर ही प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। ऐसे में हनीफ के प्रमाणपत्र बनने को लेकर तहसील स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।

डीएम के आदेश पर संदिग्ध जाति, आय व स्थाई प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है। हनीफ ने जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए गलत दस्तावेजों का प्रयोग किया। उसका जाति प्रमाणपत्र स्क्रूटनी कमेटी ने निरस्त करने की संस्तुति की है। – ऋचा सिंह, एसडीएम

पांच जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की संस्तुति

रुद्रपुर। एडीएम पंकज उपाध्याय की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को जनपदीय स्तरीय स्कूटनी कमेटी ने जाति प्रमाण पत्र संबंधी तीन प्रकरणों में सुनवाई की। इस दौरान गदरपुर क्षेत्र के एक ही परिवार के पांच जाति प्रमाण पत्रों को निरस्त किए जाने की संस्तुति की गई।

किच्छा के शिकायतकर्ता रवि कुमार ने प्रस्तुत शिकायती प्रार्थना पत्र में अभिलेखों का पूर्ण सत्यापन करने व उनके पूर्वजों के जाति/निवास के प्रमाण की जांच कराए जाने को कहा। इस पर तहसीलदार किच्छा की अध्यक्षता में समिति गठित कर 15 दिवस के भीतर सत्यापन आख्या स्पष्ट करने के निर्देश दिए। वहीं हाईकोर्ट में दायर रिट संख्या 3255/25 हरबंस सिंह बनाम सुंदर कौर में पारित आदेशों के अनुपालन में सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों को 15 दिवस का समय देते हुए अपने-अपने समर्थन में साक्ष्य/अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

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