कानपुर। विकास खंड ककवन के उत्था गांव में बीती 28 फरवरी को 2200 मीटर लंबे नाले में जमा मिट्टी की खोदाई और सफाई के काम में रजिस्टर में 48 मजदूर दर्ज किए गए, अब सिर्फ छह मजदूर काम कर रहे हैं। इसी तरह, घाटमपुर ब्लाक के गौसगंज गांव में तालाब निर्माण कार्य में 28 फरवरी के दिन 71 मजदूरों की उपस्थिति रही।
वर्तमान में वहां केवल पांच मजदूर ही काम पर हैं। यह स्थिति केवल इन गांवों तक सीमित नहीं है। जिन ब्लाकों में पहले एक दिन में करीब 3000 तक मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होती थी, वहां अब यह संख्या घटकर 250 से 350 तक रह गई है।
जानकारों का कहना है कि अभी फसलों की कटाई का काम भी नहीं चल रहा। ऐसे में मजदूरों की संख्या घटने का एक बड़ा कारण एक मार्च से अस्तित्व में आई उपस्थिति दर्ज करने की नई प्रणाली है।दरअसल, मनरेगा जल्द ही नए कलेवर में यानी विकसित भारत गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी-रामजी) योजना के रूप में लागू होने वाला है। इसमें उपस्थिति के लिए फेस रिकग्निशन प्रणाली लागू की जा रही है।
यह प्रक्रिया प्रदेश भर में अभी ट्रांजीशन फेज में है। कानपुर में एक मार्च से फेस रिकग्निशन प्रणाली लागू कर दी गई है जिसमें कार्यस्थल पर सशरीर उपस्थित होकर मजदूर आनलाइन हाजिरी दर्ज करानी होती है। नई व्यवस्था के तहत मजदूरों की उपस्थिति पंचायत सहायक द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से कार्यस्थल से आनलाइन दर्ज की जा रही है।
इसमें मजदूर के चेहरे व आंख के रेटिना को पंजीकृत फोटो से स्कैन कर मिलान किया जाता है। सत्यापन होने के बाद ही हाजिरी मान्य मानी जाती है।नई तकनीकी व्यवस्था में हाजिरी के लिए आंख मिलाने की बारी आने से योजना में काम करने वाले मजदूरों की संख्या घटी है।
इससे यह संकेत मिलता है कि पहले दर्ज की जाने वाली उपस्थिति में गड़बड़ी की संभावना थी और अब फेस रिकग्निशन प्रणाली फर्जीवाड़ा रोकने तथा योजना में पारदर्शिता लाने में प्रभावी साबित हो रही है। हालांकि, एकदम से मजदूरों की संख्या कम होने से कच्चे व पक्के दोनों तरह के काम प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इसलिए मजदूरों की संख्या बढ़ाने को अधिक से अधिक फेस रिकग्निशन व केवाईसी कराकर उन्हें सक्रिय रूप में ला रहे हैं, ताकि काम प्रभावित न हों।
मजदूर कम होने का एक कारण यह भी माना जा रहा है। उदाहरण के लिए उत्था गांव में 4600 मजदूरों के जाबकार्ड बने हैं लेकिन अभी तक 3010 का ही फेस रिकग्निशन हो सका है। गांव के पंचायत सहायक शिशिर कहते हैं कि कई मजदूरों के रेटिना मैच नहीं कर रहे हैं, जिससे फेस रिकग्निशन में दिक्कत है।
कुछ गांव से बाहर चले गए हैं और कई फैक्ट्रियों में अधिक पैसे मिलने से नौकरी करने लगे हैं। उपायुक्त मनरेगा चंद्रमोहन कनौजिया ने बताया कि मनरेगा में प्रतिदिन की मजदूरी 252 रुपये है। शुरुआती दौर में काम नया होने के कारण पंचायत सहायकों को मजदूरों को फेस रिकग्निशन प्रणाली से जोड़ने में थोड़ा समय लग रहा है। जल्द व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
