रुद्रपुर। ओडिशा की महिलाएं नारियल की जूट के धागों से अपनी गरीबी सिल रही हैं। मेंलों में स्टॉल लगाकर जूट से बने हाथी, घोड़े, कछुए, ऊंट सहित मगरमच्छ बेचकर महीने में 20 हजार रुपये तक कमा रही हैं। उनके स्टॉलों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है।
गांधी मैदान में लगे सरस मेले में ओड़ीसा के पुरी जिले से आईं भार्गवी समूह की महिलाएं जूट के धागों से अपनी जिंदगी का तानाबाना बुन रही हैं। समूह की प्रमुख विनोदी सेठी ने बताया कि उनके समूह में नौ महिलाएं हैं। पति सब्जी बेचते हैं। घर में दो बेटियां हैं। घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। करीब छह साल पहले एक दिन बेटियों की पढ़ाई और शादी का ख्याल आया तो निकल पड़ीं घर से नौकरी ढूंढ़ने। नौकरी नहीं मिली लेकिन सड़क पर पड़ी नारियल की जूट मिल गई।
विनोदी उस जूट को अपने साथ घर ले आईं। आंगन में बैठीं विनोदी उस जूट को धागों में पिरोने लगीं। देखते-देखते फूलों का गुलदस्ता तैयार कर दिया। यह देख वह खुश हो गईं। अगले दिन बाजार से 25 रुपये किलो के हिसाब से जूट खरीद लाईं। धीरे-धीरे मेंढक, हिरन मगरमच्छ तैयार कर दिए। इसके बाद उन्हें बेंचने और ज्यादा संख्या में बनाने के लिए कई और महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। आज विनोदी खुद तो दिन का 600-700 रुपये कमाती हैं। साथ ही कई अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें भी दिन का 300 से 400 कमाने में मदद करती हैं।
