पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर भारत से सिंधु जल संधि (IWT) बहाल करने का आग्रह किया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने 22 मार्च (रविवार) को विश्व जल दिवस के मौके पर इस मुद्दे को उठाया है। दूसरी ओर भारत ने इस मुद्दे पर कोई ढील बरतने के संकेत नहीं दिए हैं। भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन नहीं रोकने तक इस संधि को निलंबित रखने की बात कही है। भारत ने बीते साल अप्रैल में पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सिंधु संधि को निलंबित किया था। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने विश्व जल दिवस के अवसर पर बोलते हुए कहा, आज विशेष दिन है। दुनिया को पानी की अहमियत बताने वाले इस दिन पर भारत को अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुसार सिंधु जल संधि (IWT) को तुरंत बहाल करना चाहिए। भारत को समझना चाहिए संधि को एक पक्ष अकेले खत्म नहीं कर सकता है।
पाकिस्तान की खेती को सीधा खतरा?
आसिफ जरदारी ने कहा कि भारत ने साझा जल संसाधनों का ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल किया है। यह इस्लामाबाद के लिए गहरी चिंता का विषय है। दुनिया भी इससे आंख नहीं मूंद सकती है क्योंकि भारत का कदम लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय समझौते को कमजोर करता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सीमा-पार संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक गलत मिसाल है। पाकिस्तान की भारत से आने वाली नदियों पर निर्भरता की ओर इशारा करते हुए जरदारी ने कहा, ‘पानी तक पहुंच हमारे संविधान के तहत बुनियादी हक है। भारत का आचरण खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालता है। यह लाखों लोगों की आजीविका को जोखिम में डालता है, जो इन जल संसाधनों पर निर्भर हैं। मैं भारत से अपील करता हूं कि इस संधि को पूरी तरह से बहाल करे।’
सिंधु जल संधि क्या है?
विश्व बैंक की मध्यस्थता से सात दशक पहले हुई यह संधि भारत और पाकिस्तान में नदियों के पानी का बंटवारा करती है। इसके तहत पाकिस्तान को सिंधु बेसिन की पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब पर अधिकार देती है। भारत पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज के उपयोग का नियंत्रण रखता है। कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 के आतंकी हमले के बाद भारत ने IWT को स्थगित करने का ऐलान किया था। इस संधि के तहत पाकिस्तान के बड़े हिस्से को खेती और दूसरी जरूरतों को लिए पानी मिलता है। ऐसे में पाकिस्तान घरेलू स्तर से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा तक, तमाम मंचों तक इस मुद्दे को उठा रहा है।
भारत सरकार का रुख कड़ा
पाकिस्तान की कोशिश के बावजूद भारत सरकार इस मुद्दे पर नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। विश्व जल दिवस के कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने साफ किया कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी, जब तक इस्लामाबाद आतंक को समर्थन बंद नहीं करता है। हरीश ने कहा कि भारत ने 1960 की संधि पर सद्भावना के साथ हस्ताक्षर किए लेकिन पाकिस्तान ने युद्धों और आतंकी हमलों के जरिए समझौते को कमजोर किया।
