पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में रेप की FIR रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बालिग (वयस्क) महिला अपनी मर्ज़ी से लंबे समय तक किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाती है, तो इसे “तथ्यों की गलतफहमी” या धोखे से बना संबंध नहीं माना जा सकता।
इस मामले में महिला के पति ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने जबरदस्ती संबंध बनाए और ब्लैकमेल किया। लेकिन जांच में ब्लैकमेल का कोई सबूत नहीं मिला।
कोर्ट ने पाया कि:
दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई थी
बाद में आपसी सहमति से संबंध बने
यह रिश्ता काफी समय तक चलता रहा
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में रेप (धारा 376) का आरोप नहीं बनता, क्योंकि इसमें जबरदस्ती या धोखे के जरूरी सबूत नहीं हैं।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने FIR और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्रवाई को रद्द कर दिया।
