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सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा है कि अगर नीलामी में खरीदार तय समय के अंदर पूरी रकम जमा नहीं करता, तो बिक्री पूरी नहीं मानी जाएगी। ऐसे में अगर कर्जदार इस बीच अपना पूरा बकाया चुका देता है, तो उसे अपनी संपत्ति वापस पाने का अधिकार रहेगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SARFAESI नियमों के तहत नीलामी की बची रकम 3 महीने में जमा करना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होता, तो सिर्फ बिक्री सर्टिफिकेट जारी होने से बिक्री वैध नहीं मानी जाएगी।

इस मामले में खरीदार ने करीब 15 महीने बाद भुगतान किया, जबकि कर्जदार ने बाद में पूरा कर्ज चुका दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए नीलामी रद्द कर दी और संपत्ति कर्जदार को वापस देने का आदेश बरकरार रखा।

कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन नहीं होने पर नीलामी खरीदार को कोई पक्का अधिकार नहीं मिलता और कर्जदार को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

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