शाहजहांपुर में स्वास्थ्य विभाग में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के मामले में जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) मैनेजर संतोष कुमार सिंह समेत 12 कर्मियों पर चौक कोतवाली में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मिर्जापुर के गांव मझारा बढ़ऊ निवासी संतराम कश्यप ने दिसंबर में डीएम को प्रार्थनापत्र देकर फर्जीवाड़े से अवगत कराया था। डीएम के निर्देश पर सीडीओ की जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। इसमें दिव्यांग बोर्ड के सामने उपस्थित हुए बिना ही फर्जी प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए थे। 23 फरवरी को जनसुनवाई में शिवप्रताप, दलवीर, अच्छू मियां, रिंकी, अनिल ने जांच कमेटी को बताया कि उनके दिव्यांग प्रमाणपत्र सीएमओ कार्यालय से ही बने हैं। कार्यालय के पटल सहायक ने अपने मोबाइल पर ओटीपी लेकर सरेंडर भी कर दिए हैं। सीडीओ की जांच में पटल सहायक की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हुई थी।
डीएम के निर्देश पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट
डीएम के निर्देश के बाद सीएमओ कार्यालय के जिला प्रशासनिक अधिकारी राम किशोर ने चौक कोतवाली में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई। दर्ज कराई रिपोर्ट में कनिष्ठ सहायक सेवानिवृत्त आरके मिश्रा, वरिष्ठ पटल सहायक सतीश चंद्र, डीईआईसी मैनेजर संतोष कुमार सिंह, डाटा इंट्री ऑपरेटर रोहित कुमार मिश्रा, शिवम गंगवार, वीर सिंह, दीप सिंह, रवि कुमार, सुबोध कुमार सिंह, कंप्यूटर सहायक अर्जुन श्रीवास्तव, प्रोग्राम सहायक दीपा सिंह, ब्लॉक डाटा मैनेजर शशांक गौरव को नामजद किया गया है।
अपात्रों से की जाएगी रिकवरी
आरोप है कि यूपीआईडी पोर्टल पर आवेदन के बाद बोर्ड के सामने उपस्थित होने पर नियम के अनुसार परीक्षण कराकर दिव्यांग प्रमाणपत्र बुकलेट में प्रविष्टि अंकित करनी चाहिए थी। संबंधित कर्मियों ने दिव्यांग बोर्ड के बिना निर्देश के ही प्रमाणपत्र अपलोड कर दिए। लाभार्थियों से अनुचित लाभ लेकर पद का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी की गई। इन्हीं प्रमाणपत्रों के जरिये लाभार्थियों ने सरकारी योजनाओं का लाभ लिया। स्थानीय पटल सहायक अखिलेश गुप्ता की मृत्यु होने के कारण उनका नाम रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। वहीं, फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के जरिये पेंशन ले रहे लोगों से रिकवरी की जाएगी। उनको नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
