उत्तर प्रदेश। घर में नमाज पढ़ने से रोके जाने के आरोपों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बरेली के जिलाधिकारी (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को अवमानना नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगली तिथि तक याची के विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार याची तारिक खान ने याचिका में कहा है कि 16 जनवरी को मोहम्मदगंज गांव में एक निजी आवास पर नमाज अदा की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें सहित कुल 12 लोगों को हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में सभी को रिहा कर दिया गया, लेकिन याची का आरोप है कि यह कार्रवाई उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रथम दृष्टया माना कि प्रतिवादी संख्या दो और तीन—जिलाधिकारी तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक—ने पूर्व में पारित न्यायालयीय आदेश का उल्लंघन किया है, जिसके चलते उन्हें अवमानना नोटिस जारी किया गया।
उल्लेखनीय है कि 27 जनवरी 2026 को मारनाथा फुल गॉस्पेल मिनिस्ट्रीज बनाम यूपी राज्य व अन्य प्रकरण में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थना के लिए सरकारी अनुमति आवश्यक नहीं है। इसी आदेश के संदर्भ में वर्तमान मामले को देखा जा रहा है।
न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया है कि वह संबंधित अधिकारियों से निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई पर न्यायालय को अवगत कराएं।
