हाईकोर्ट के आदेश के बाद अल्मोड़ा के कोसी कटारमल स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान की जमीन पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। करीब 10-15 वर्षों से कब्जे में रही लगभग 6 एकड़ (120 नाली) जमीन को खाली कराने के लिए पहले चरण में अवैध अस्थायी ढांचों को ध्वस्त किया गया।
तहसीलदार ज्योति धपवाल के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर संस्थान के अधिकारियों के साथ कार्रवाई की। संसाधनों की कमी के चलते फिलहाल पक्के निर्माण नहीं हटाए जा सके, लेकिन प्रशासन ने साफ किया है कि जल्द ही इन पर भी बुलडोजर चलाया जाएगा।
अब पक्के निर्माणों पर चलेगा बुलडोजर
प्रशासन के मुताबिक, अगले दो दिनों में पूरी तैयारी के साथ टीम दोबारा मौके पर पहुंचेगी और रिसॉर्ट समेत सभी स्थायी अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। संस्थान की यह जमीन वर्ष 1990-91 में शोध कार्यों के लिए आवंटित की गई थी, लेकिन बीते 10-15 वर्षों में यहां धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ता गया।
शिकायत के बाद खुला मामला
यह मामला तब सामने आया जब सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय के निर्देश पर जमीन का सीमांकन कराया गया, जिसमें अतिक्रमण की पुष्टि हुई। सीमांकन के बाद लगाए गए बोर्ड भी कब्जाधारियों ने हटा दिए थे, जिस पर सोमेश्वर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हो सकी।
अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है और जल्द ही पूरी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी है।
