दुनिया के पहले कॉमिक सुपरहीरो की बात करें तो नाम सुपरमैन या बैटमैन नहीं, बल्कि The Phantom का आता है। बच्चों के बीच कभी इस किरदार का जबरदस्त क्रेज था। दिलचस्प बात यह है कि आज जिस बैंगनी पोशाक के लिए फैंटम मशहूर है, वह असल में लेखक की पसंद नहीं बल्कि एक प्रिंटिंग गलती का नतीजा थी।
इस ऐतिहासिक किरदार की रचना अमेरिकी लेखक Lee Falk ने महज 24 साल की उम्र में की थी। 17 फरवरी 1936 को पहली बार फैंटम प्रकाशित हुआ। फॉक ने इस किरदार को गढ़ते समय King Arthur, Tarzan और The Jungle Book जैसी कहानियों से प्रेरणा ली थी। फैंटम का लुक अपने समय के अन्य किरदारों से अलग था। उसकी स्किन-फिट ड्रेस Robin Hood से प्रेरित थी, जबकि बिना पुतलियों वाला मास्क ग्रीक मूर्तियों से लिया गया आइडिया था। शुरुआत में लेखक उसकी ड्रेस का रंग ग्रे रखना चाहते थे, लेकिन 1939 में जब रंगीन संस्करण आया तो एक कलरिस्ट ने गलती से उसे पर्पल कर दिया। बच्चों को यह रंग इतना पसंद आया कि वही फैंटम की स्थायी पहचान बन गया। हालांकि अलग-अलग देशों में यह लाल, नीले और भूरे रंग में भी छपा।
भारत में फैंटम ‘वेताल’ नाम से बेहद लोकप्रिय हुआ। 1964 में Indrajal Comics ने इसे भारतीय पाठकों तक पहुंचाया, जिसके पीछे Anant Pai की बड़ी भूमिका थी। हिंदी, बंगाली और तमिल भाषाओं में छपने से यह हर वर्ग तक पहुंचा।
1980 के दशक में वेताल की लोकप्रियता चरम पर थी। कॉमिक दुकानों पर नए अंक के लिए बच्चों की लंबी कतारें लगती थीं। 1960 के दशक तक फैंटम की कॉमिक स्ट्रिप दुनिया भर के 500 से ज्यादा अखबारों में छपकर इतिहास बना चुकी थी।
