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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि राजधानी अब बाल तस्करी की मंडी बन गई है। कोर्ट ने रेलवे स्टेशनों और आसपास के इलाकों में खुलेआम हो रही बाल तस्करी पर चिंता जताते हुए रेलवे, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस की ओर से दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली अब बाल तस्करी की मंडी बन गई है। इसकी पुष्टि के लिए याचिका पढ़ने की जरूरत नहीं, सिर्फ दो घंटे रेलवे स्टेशनों के आसपास घूम लीजिए। पीठ ने कहा कि बाल तस्करी की समस्या न्यायिक आदेशों के बावजूद कम नहीं हुई है। कोर्ट ने बाल संरक्षण आयोग को आंकड़े उपलब्ध कराने और उचित दिशा-निर्देश देने के लिए सुझाव देने को कहा।
मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। अदालत ने आदेश में कहा कि कोर्ट ने बार-बार चिंता जताई और निर्देश दिए, लेकिन समस्या अभी भी अनियंत्रित है। कोर्ट ने माना कि रेलवे समेत संबंधित विभागों ने उपाय किए, लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन की कमी के कारण स्थिति नहीं बदली।
6 साल में रेलवे परिसर से रेस्क्यू किए गए 84 हजार बच्चे
याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने बताया कि 2018 से 2024 के बीच रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स ने रेलवे परिसर से 84,000 से अधिक बच्चों को बचाया। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आनंद विहार रेलवे स्टेशन से बचाई गई एक लड़की को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के बजाय तस्करों को सौंप दिया गया, जिसे बाद में फिर से रेस्क्यू करना पड़ा। वहीं, याचिका में यह भी कहा गया कि मंत्रालय ने ऐसे बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की, लेकिन विभाग इसे गंभीरता से उल्लंघन कर रहे हैं।
